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*🟢👉सीरूपुरा में भीषण जल संकट: 300 आदिवासी ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरसे, 1 किमी दूर से ला रहे पानी*.......*🟢👉हैंडपंप दो साल से बंद, नल-जल योजना फेल, बिजली की अनियमितता से चूल्हे तक ठंडे*

नर्मदापुरम /सिवनीमालवा।तहसील से लगभग 15 किलोमीटर दूर ग्राम लोखरतलाई के अंतर्गत आने वाला आदिवासी बहुल्य टोला सीरूपुरा इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रहा है। करीब 300 की आबादी वाले इस क्षेत्र में पेयजल के सभी स्रोत लगभग समाप्त हो चुके हैं, जिससे ग्रामीणों का जीवन अत्यंत कठिन हो गया है। हालात ऐसे हैं कि महिलाएं और बच्चे रोजाना करीब एक किलोमीटर दूर खेतों में लगे निजी नलकूप से पानी लाने को मजबूर हैं।गांव के स्कूल सहित तीन हैंडपंप पिछले लगभग महीनों से खराब पड़े हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद पीएचई विभाग ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना भी सीरूपुरा में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। पिछले चार महीनों से जल स्रोत सूख जाने के कारण सप्लाई बंद है, जिससे ग्रामीणों की उम्मीदें भी टूट चुकी हैं।गांव के लोग रोजाना खेतों में लगे निजी नलकूपों से पानी भरकर ला रहे हैं। इस दौरान महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए पास के किसान   अपने खेत के नलकूप से पीने का पानी उपलब्ध करा रहे हैं।स्थिति इतनी गंभीर है कि पानी की उपलब्धता पूरी तरह बिजली पर निर्भर हो गई है। बिजली आने पर ही नलकूप चलता है और तभी घरों में चूल्हा जल पाता है। गांव में बिजली की आपूर्ति भी अनियमित है—कभी दिन में तो कभी रात में। ऐसे में कई परिवारों को भूखे रहने की नौबत तक आ रही है।सरपंच प्रतिनिधि रवि गुप्ता के अनुसार, इस समस्या को लेकर पीएचई विभाग, स्थानीय विधायक और एसडीएम को कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।सीरूपुरा की स्थिति प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जहां एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता के बड़े दावे कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बंद पड़े हैंडपंपों की तत्काल मरम्मत कराई जाए,नल-जल योजना के जल स्रोत को पुनर्जीवित किया जाए।ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।पीएचई विभाग के प्रभारी एसडीओ उमेश कोडले ने बताया कि नल-जल योजना के तहत खोदे गए बोर का परीक्षण किया जाएगा और संभव हुआ तो बंद पड़े हैंडपंपों को भी शीघ्र चालू कराया

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