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*🟣👉स्प्रिंगडेल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हाउस-वाइज स्पेलाथॉन प्रतियोगिता का भव्य आयोजन*


नर्मदापुरम। स्प्रिंगडेल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं भाषा कौशल को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से दिनांक 30 दिसंबर को कक्षा VI से IX तक के विद्यार्थियों हेतु हाउस-वाइज स्पेलाथॉन प्रतियोगिता का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में विवेकानंद हाउस, श्री अरविंदो हाउस, रविंद्रनाथ टैगोर हाउस एवं सुभाष चंद्र बोस हाउस के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में वर्तनी शुद्धता, शब्द-ज्ञान, त्वरित निर्णय क्षमता, स्मरण शक्ति, तार्किक सोच एवं आत्मविश्वास का विकास करना था। संपूर्ण वातावरण ऊर्जा, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा एवं सीखने की भावना से ओत-प्रोत रहा। कार्यक्रम के अंतर्गत कुल छह ज्ञानवर्धक एवं रोचक चरण आयोजित किए गए, जिनमें बजर राउंड, पासिंग राउंड, रैपिड फायर राउंड, चित्र आधारित राउंड, वन-वर्ड सब्स्टीट्यूशन राउंड सहित अन्य शब्दावली आधारित गतिविधियाँ सम्मिलित थीं।प्रत्येक चरण विद्यार्थियों की भाषा समझ, एकाग्रता एवं बौद्धिक क्षमता के समग्र मूल्यांकन हेतु सुव्यवस्थित रूप से तैयार किया गया था। कार्यक्रम की गरिमा को मुख्य अतिथि डॉ. विनिता अवस्थी सेवानिवृत्त प्रोफेसर एनएमवी कॉलेज, नर्मदापुरम की उपस्थिति ने विशेष रूप से बढ़ाया। साथ ही डॉ. आशीष चटर्जी (डायरेक्टर) , श्रीमती जूही चटर्जी (डायरेक्टर), सुभाशीष चटर्जी (डायरेक्टर), श्रीमती मोना चटर्जी (प्राचार्य), श्रीमती सोनल सोखी (जनरल मैनेजर) एवं श्रीमती लक्ष्मी पलोहिया (उप-प्राचार्य) की सम्माननीय उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक प्रेरणादायी बना दिया। इस प्रतियोगिता का सफल आयोजन श्रीमती शीतल कंकाले एवं श्रीमती प्रमिला कलम के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कक्षा VI से IX तक के शिक्षकों ने अनुशासन बनाए रखने एवं कार्यक्रम के सुचारु संचालन में सराहनीय सहयोग प्रदान किया। प्रतियोगिता के समापन अवसर पर श्री अरविंदो हाउस ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विजेता ट्रॉफी अपने नाम की, जबकि रविंद्रनाथ टैगोर हाउस उपविजेता रहा। विजेता प्रतिभागियों की भाषा दक्षता, टीम भावना एवं समर्पण की सभी अतिथियों एवं शिक्षकों द्वारा भूरि-भूरि प्रशंसा की गई। समग्र रूप से यह स्पेलाथॉन प्रतियोगिता विद्यार्थियों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक सिद्ध हुई, बल्कि उनमें भाषा के प्रति रुचि, आत्म विश्वास एवं स्वस्थ प्रतिस्पर्धात्मक भावना को विकसित करने में भी अत्यंत सफल रही।

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