नर्मदापुरम /सिवनीमालवा।ग्राम भांवदा की शासकीय भूमि पर हुए सागौन वृक्षों की अवैध कटाई के मामले में प्रशासनिक कार्रवाई की धीमी रफ्तार पर सवाल खड़े होने लगे हैं। शिकायत के लगभग दो वर्ष बीत जाने के बाद भी दोषियों के विरुद्ध कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों एवं पर्यावरण प्रेमियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार राजस्व एवं वन विभाग के संयुक्त निरीक्षण में शासकीय भूमि पर 81 सागौन वृक्षों की अवैध कटाई तथा 60 ठूंठों पर हैमर निशान पाए जाने की पुष्टि की गई थी। जांच प्रतिवेदन भी संबंधित अधिकारियों को सौंपा जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई है।मामले के शिकायत कर्ता चंद्रशेखर बाथव का आरोप है कि भोले-भाले आदिवासी ग्रामीणों को गुमराह कर एक ठेकेदार द्वारा पूरे मामले को अंजाम दिया गया, जिससे शासन को लाखों रुपये के राजस्व की हानि हुई है। साथ ही क्षेत्र के पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है।शिकायतकर्ता का कहना है कि जब सरकारी जांच में अवैध कटाई की पुष्टि हो चुकी है, तब भी दोषियों के खिलाफ न तो प्रभावी वसूली की गई और न ही कोई कठोर दंडात्मक कार्रवाई सामने आई है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं होती है तो वे नर्मदापुरम संभाग के आयुक्त (कमिश्नर) से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी देंगे।उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उच्च स्तर पर भी न्याय नहीं मिला तो मामले को न्यायालय में ले जाकर कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। उनका कहना है कि शासन को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई दोषी ठेकेदार से कराई जानी चाहिए तथा पर्यावरण को पहुंचाई गई क्षति के लिए भी सख्त कार्रवाई होना आवश्यक है।अब सवाल यह उठ रहा है कि जब सरकारी जांच में अवैध कटाई की पुष्टि हो चुकी है, तो आखिर दोषियों पर कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है? क्षेत्र के नागरिक और पर्यावरण प्रेमी प्रशासन से शीघ्र एवं निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
